SIR पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टता: 10वीं का एडमिट कार्ड सहायक दस्तावेज माना जाएगा

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टता: 10वीं का एडमिट कार्ड सहायक दस्तावेज माना जाएगा

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर शीर्ष अदालत ने अहम स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने कहा कि कक्षा 10 का एडमिट कार्ड, यदि संबंधित पास प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो उसे सहायक दस्तावेज के रूप में माना जा सकता है, लेकिन यह अपने आप में पूर्ण पहचान पत्र नहीं होगा।

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया की उस पीठ ने की, जिसकी अगुवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत कर रहे थे और जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने यह सवाल उठाया था कि क्या 10वीं का एडमिट कार्ड अकेले मान्य दस्तावेज माना जा सकता है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि इसे केवल पूरक दस्तावेज के तौर पर ही स्वीकार किया जा सकता है।

लंबित दस्तावेजों पर निर्देश

पीठ ने 24 फरवरी 2026 के अपने आदेश में कहा कि जो दस्तावेज 15 फरवरी से पहले प्राप्त हो चुके हैं लेकिन अब तक अपलोड नहीं किए गए, उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि माध्यमिक स्तर का एडमिट कार्ड पास प्रमाणपत्र के साथ जन्मतिथि और अभिभावक संबंध स्थापित करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

80 लाख दावे-आपत्तियों की जांच

SIR प्रक्रिया के तहत करीब 80 लाख दावों और आपत्तियों की जांच होनी है। अदालत ने प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दी है। पश्चिम बंगाल में 250 जिला न्यायाधीशों के अलावा अनुभवी सिविल जजों को भी इस कार्य में लगाया जा सकेगा।

अदालत ने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर पड़ोसी राज्यों के उच्च न्यायालयों से भी समान स्तर के न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है, ताकि तय समयसीमा के भीतर जांच पूरी हो सके।

पारदर्शिता पर जोर

पीठ ने कहा कि SIR प्रक्रिया तार्किक विसंगतियों और “अनमैप्ड” श्रेणी के मामलों की जांच के लिए चलाई जा रही है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।